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सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल में 1.67 लाख अवैध कब्जे हटाने के हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल में 1.67 लाख अवैध कब्जे हटाने के हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई

यथास्थिति बनाए रखने का आदेश, फिलहाल सरकारी भूमि से कब्जे हटाने की कार्रवाई रुकी

धारा 163-ए को असांविधानिक ठहराने वाले हाईकोर्ट के फैसले पर अब सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त सुनवाई होगी


शिमला। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में सरकारी भूमि पर बताए गए करीब 1.67 लाख अवैध कब्जों को हटाने संबंधी हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए फिलहाल प्रदेश में सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई की। अदालत ने विवादित संपत्ति के संबंध में अगले आदेश तक वर्तमान स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए और मामले में पूनम गुप्ता व अन्य को नोटिस जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से याचिका दायर करने में हुई देरी को भी स्वीकार करते हुए देरी माफ करने के आवेदन को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही सरकार को अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष विवादित भूमि पर किसी प्रकार का बदलाव नहीं करेंगे।

शीर्ष अदालत ने इस मामले को पहले से लंबित विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 30494/2025 के साथ जोड़ने का आदेश दिया है, ताकि दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ की जा सके। इससे समान कानूनी प्रश्नों पर एकरूप निर्णय देने में सुविधा होगी।

 क्या है पूरा मामला

यह विवाद 5 अगस्त 2025 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा सीडब्ल्यूपी 1028/2002 (पूनम गुप्ता मामला) में दिए गए फैसले से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम की धारा 163-ए को असांविधानिक करार देते हुए सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने सरकार को तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने का आदेश भी दिया था।

हाईकोर्ट का मत था कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों को नियमित करने का प्रावधान कानून के अनुरूप नहीं है और इससे अतिक्रमण को बढ़ावा मिलता है। इसी फैसले को चुनौती देते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल विवादित सरकारी भूमि पर न तो कब्जे हटाए जाएंगे और न ही किसी प्रकार का नया निर्माण या स्थिति में बदलाव किया जा सकेगा। मामले की अंतिम सुनवाई के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।